15 अग॰ 2014

मानव-सा महान मेरा राष्ट्र रहे!


भारत भाल भाग्य बसे,
सागर सा अतल अकार रहे,
निखर प्रखर प्रकाश स्तम्भ,
संसार शिखर पर सदा रहे।

नीरज-नयन नमित मन,
जन जीवन यहाँ खुशहाल रहे,
माटी से मेहनत, पर्वत से पौरुष,
नदियों का संगम आध्यात्म रहे।

संकल्प समस्त समभाव का,
सदियों की धरोहर सिरोधार्य रहे,
नीति कृष्ण की गीता महाभारत,
ह्रदय में हमारे रामायण रहे।

धन की धारा संतोष शांत,
धर्म धरा का अहिंसक बलवान,
गंगा गाँधी अगिनत गुणवान 
मानव सा महान मेरा राष्ट्र रहे।