रहमोकरम पे आपके/
हमने गुजारें हों/
कुछ पल अगर,
यूँ ना समझना/
सुकून से जीकर/
मर सकें हैं हम।
टूटते रहे थे/
मेरे आसमान के तारे/
एक-एक कर,
रौशनी की लकीर/
दीखती न थी,
बढ़ता जाता था/
अंधेरे का डर।
अजीबोगरीब हुए हादशे/
जिंदगी में हमारे/
यकीन ना होगा,
तबियत से उजाडा/
अपनों ने आशियाँ/
मिलकर जो था बसाया।
रातें होती थीं काली/
दिन भी रौशन ना थे,
शाम-ओ-सहर/
पुकारते रौशनी को/
खड़े रहते थे/
दरवाज़ा खोलकर।
हिम्मत जो की होती/
जिगर फौलाद करने की,
रिश्तों को समझते/
काश समय रहते,
आज अश्कों के हमारे/
मायने अलग होते।
हमने गुजारें हों/
कुछ पल अगर,
यूँ ना समझना/
सुकून से जीकर/
मर सकें हैं हम।
टूटते रहे थे/
मेरे आसमान के तारे/
एक-एक कर,
रौशनी की लकीर/
दीखती न थी,
बढ़ता जाता था/
अंधेरे का डर।
अजीबोगरीब हुए हादशे/
जिंदगी में हमारे/
यकीन ना होगा,
तबियत से उजाडा/
अपनों ने आशियाँ/
मिलकर जो था बसाया।
रातें होती थीं काली/
दिन भी रौशन ना थे,
शाम-ओ-सहर/
पुकारते रौशनी को/
खड़े रहते थे/
दरवाज़ा खोलकर।
हिम्मत जो की होती/
जिगर फौलाद करने की,
रिश्तों को समझते/
काश समय रहते,
आज अश्कों के हमारे/
मायने अलग होते।
