9 मार्च 2016

कविता के टुकड़े...

=>अखबार =>
आजकल
मैं पढता नहीं अखबार,
एक ही ख़बर
बार-बार।


=> कविता=>
शब्दों को तोड़कर
हेर-फेर कर
जो लिख जाता हूँ
कहता हूँ है कविता।