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1 जुल॰ 2014

बचपन की आली

guileless pal of childhood- I miss you...
अधखिली कली वो जूही की
मेरे बचपन की आली थी, 
मेरे सपनो की गलियों में 
फिरती बनी मतवाली थी।

चंचल चितवन, गोरी शबनम
सोम-सुधा की प्याली थी,
वह वसंत के दिन में
मेरे जीवन की हरियाली थी।

जब यौवन सावन घिर आया
दूर खड़ी भरमाती थी,
गुमसुम गुपचुप नयनों से
उसकी छुअन सहलाती थी।

पाक जिस्म मैं, मन से भोला
वो मासूम हिय की वाणी थी,
गया वसंत ना आएगा
हुई मुझसे नादानी थी।