अजीब-सा रास्ता
भूली हुई राह
एक और रात
लो फिर आ गई!
भुला-भुला-सा प्यार
भूली-भूली-सी जगह
एक और रात
लो फिर आ गई!
मुझे समझ में नहीं आया
कहानी की क्या विषय थी
एक और रात
लो फिर आ गई!
चेहरे पर उदासी
मन में क्या बात थी
एक और रात
लो फिर आ गई!
मन प्रसन्न था
बात खुशी से होने लगी
एक और रात
लो फिर आ गई!
एक रात जागे थे
एक दिन सोये थे
एक और रात
लो फिर आ गई!
प्यारा-प्यारा-सा स्वप्न
प्यारी-प्यारी-सी बात
एक और रात
लो फिर आ गई!
उनसे मैं खुश था
वो मुझसे नाराज़ थे
एक और रात
लो फिर आ गई!
Neeraj Kumar has been publishing blog on various topics for a long time. It started with publishing his Short Hindi Poems. Now it is time to write on wide range of subjects which affects people in a big way. Hope he can showcase real person who is emotional to the world and the humanity.
फ़ॉलोअर
29 अक्टू॰ 2009
19 अक्टू॰ 2009
मेरी कुछ बातें
मैं सोचता हूँ
हर दिन
कुछ करुँ नया!
सोचते-सोचते
कुछ न मिला
और वो दिन
बीत गया!
मेरा सवेरा
होता था
कुछ ख़ास
लम्हों के साथ!
बीतती थी
मेरी रात
एक नए
सोच के साथ!
दीवार बनकर
उदासी मेरे
दिल पर!
क्या करुँ,
क्या न करुँ
बचकर रहता हूँ
इससे मैं घबराकर!
मैं अपनी
दिली इच्छा से
बैठता हूँ
कोई नया काम करने!
लेकिन कुछ लोग
ऐसे मिल जाते हैं
जो लग जाते हैं
उसे रोकने!
मैं अपनी
उदासी भरी बात
आज आप लोगों से
व्यक्त कर रहा हूँ!
आप इसे
समझ सकतें हैं
तो समझें
नहीं तो मैं
कुछ भी नहीं
कह रहा हूँ!
कोई भी काम
मैं ठीक से
नहीं कर पाटा
मेरे मन में
घबराहट गूंजती है
जिसे मैं
कह नहीं पाटा!
"मेरी कुछ बातें"
किसी की दिलों में
नहीं जाती!
सब अपने
रहते हैं मग्न
और मेरी बात
समझ में नहीं आती!
14 अक्टू॰ 2009
इरादे
इरादे अच्छे होते होते हैं
इरादे बुरे होते हैं
पर क्यों होते हैं वे अच्छे या बुरे?
दिल तो बुरा नहीं होता,
दिल भी बुरा नहीं होता
और इनमें ही बनते हैं इरादे!
इरादे बुरे होते हैं
पर क्यों होते हैं वे अच्छे या बुरे?
दिल तो बुरा नहीं होता,
दिल भी बुरा नहीं होता
और इनमें ही बनते हैं इरादे!
6 अक्टू॰ 2009
छोटी-सी एक ग़ज़ल
घर की तामीर चाहे जैसी हो
इसमें रोने की जगह रखना!
जिस्म में फैलने लगा है शहर
अपनी तन्हाईयाँ बचा रखना!
मस्जिदें हैं नमाजियों के लिए
अपने दिल में कहीं खुदा रखना!
मिलना-जुलना जहाँ जरुरी हो
मिलने-जुलने का हौसला रखना!
उम्र करने को है पचास को पार
कौन है किस जगह पता रखना!
इसमें रोने की जगह रखना!
जिस्म में फैलने लगा है शहर
अपनी तन्हाईयाँ बचा रखना!
मस्जिदें हैं नमाजियों के लिए
अपने दिल में कहीं खुदा रखना!
मिलना-जुलना जहाँ जरुरी हो
मिलने-जुलने का हौसला रखना!
उम्र करने को है पचास को पार
कौन है किस जगह पता रखना!