खुदी को किया बुलंद हिम्मत से अपने,
दुश्मन थे जो सर झुकाने लगे हैं॥
गलियों से आजकल गुजरने पर मेरे
झरोखे भी अब मुस्काने लगे हैं॥
सड़कों पे अजनबी जितने थे चेहरे
आसपास महफ़िल सजाने लगे हैं॥
जमाने का ऐसा हो गया है रिवाज,
उन्नति को अपना बताने लगे हैं॥
जिंदगी को बाहों में भर लिया मैंने,
ख्वाबों में तारे जगमगाने लगे हैं॥
मुझे है इंतज़ार पैगाम का तेरे,
राहों में पलकें बिछाने लगे हैं॥
मुहब्बत की दुनिया बनाई थी हमने,
ख्यालों से उसको सजाने लगे हैं॥
इन्तहां हो गई जब इम्तहान की मेरे,
बाँहों में तुझे तब पाने लगे हैं॥
Neeraj Kumar has been publishing blog on various topics for a long time. It started with publishing his Short Hindi Poems. Now it is time to write on wide range of subjects which affects people in a big way. Hope he can showcase real person who is emotional to the world and the humanity.
फ़ॉलोअर
21 नव॰ 2009
18 नव॰ 2009
ग़ज़ल:- (साभार:- हिंदुस्तान अखबार)
वो साहिल पे गाने वाले क्या हुए!
वो कश्तियाँ चलाने वाले क्या हुए!
वो सुबह आते-आते रह गई कहाँ
जो काफिले थे आने वाले क्या हुए!
वो कश्तियाँ चलाने वाले क्या हुए!
वो सुबह आते-आते रह गई कहाँ
जो काफिले थे आने वाले क्या हुए!
13 नव॰ 2009
आपसे मिलकर
कुछ कदम ऐसे मिले
जो अर्सों से दूर थे!
कुछ बात ऐसी सुनी
जो अर्सों से गुमशुदा थी!
पुराने दोस्त लौट आए!
पुरानी यादें लौट आई!
ढूंढ रहे थे जिसे हम
वो अब हैं मिल पाये!
खुश हुए हैं आपसे मिलकर
खुश हो जाइये आप भी!
मत सोचिये अब मुझे
और कुछ कीजिये भी!
जो अर्सों से दूर थे!
कुछ बात ऐसी सुनी
जो अर्सों से गुमशुदा थी!
पुराने दोस्त लौट आए!
पुरानी यादें लौट आई!
ढूंढ रहे थे जिसे हम
वो अब हैं मिल पाये!
खुश हुए हैं आपसे मिलकर
खुश हो जाइये आप भी!
मत सोचिये अब मुझे
और कुछ कीजिये भी!
11 नव॰ 2009
चौराहा पे राही

हर वक़्त ख़ुद को चौराहे पर खड़ा पाता हूँ,
टार्च पास नहीं, अंधेरे में भटक जाता हूँ।
जो सीधे रास्ते चले थे आगे निकल गए,
हम नए राह की खोज में पिछरते चले गए।
वक्त का तकाजा समझा मैं ठोकरों के बादलहूलुहान थी शख्सियत, खुले थे मेरे हाथ।
गर चाहते हो तुम, दामन भरा हो खुशियों से,
करो मेहनत, गुजरो सदा पुरानी राहों से।
कतरा-कतरा जिंदगी, जिहाद का ऐलान है,
हरेक रास्ता हिम्मती के, पाँव का निशान है।
उस आदमी की मिटटी होती है कुछ खास ही,
ख़ुद बनाता है जो अपनी राह भी, मुकाम भी।