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29 सित॰ 2009

आज की नारी

बेटी आज की गाय नहीं
जिसे खूंटे में बाँध दो
और चरणे को थोरी सी घास दाल दो!
वह आज की नारी है
उसकी प्रगति जारी है!
आज...
वह
जलती हुई
मोमबत्ती है
और
पिघलता हुआ मोम,
आज की नारी
उन्नति की ऐसी शिला है
जिसके सहयोग से
समाज का नया रूप खिला है!

26 सित॰ 2009

क्या होगा !!!

मंजिल-मंजिल सोच रहा था,
कदम-कदम पर खोज रहा था,
मिला नही जवाब कोई...
मैं आज तक
तड़प-तड़प कर मर रहा था!

पूछता था हर कोई
क्या हुआ है, बता तू?
उनसे डर कर,
सोच-सोच कर
मैं ये दिल से पूछ रहा था-
नसीब में मेरे क्या लिखा था
ये मैं नहीं जानता था!

आगे क्या होगा मेरा
ये मैं नहीं जानता था!
पूछ लो दिल से
दिल ये कह रहा है!

खुश हो जाओ
दिल से दिल
ये कह रहा है!

24 सित॰ 2009

आने वाला कल...

ज़िन्दगी के सफर में
रोज
नया तूफान खड़ा !
तू क्या सोच रहा
कुछ कर के दिखा!
ये पल बीत जाएगा
ये कल कभी न आएगा!
जो बीत सो बीत आएगा
कुछ आगे करने की
सोच जरा!
तूने जो किया
अब तक,
उसे अपने सोच से हटा दे!
तेरे साथ क्या होगा अब
ये सबको तू बता दे!
तेरी
जब कभी ज़िन्दगी बर्बाद होगी,
तू मौत का देखेगा
तेरी जब वो हाल होगी!
लंबा सफर तय करना है
अभी कहीं नहीं पहुँचा है!
इस सफर का अंत ना होगा
तू क्या सोच रहा है!
आने वाले कुछ समय में
लोग बदल जब जायेंगे,
"आने वाले पल" को
लोग समझ ना पाएंगे!
तेरी स्थिति ठीक नहीं है
कुछ समय के लिए!
इस पल को बर्बाद ना कर
आने वाले समय के लिए!

23 सित॰ 2009

सपना और सच...

मुझे हक है
आगे बढ़ने का
कुछ करने का !

मन से कहता हूँ
इच्छा जताता हूँ
बैठता हूँ करने
कर नहीं पाता हूँ!

कोशिश करता हूँ
सफलता पाने की
असफलता हाथ लगती है!

मन की इच्छा
पूरी नहीं हो पाती
मन में अजीब-सी
हरकत होने लगती है!

आसन से काम को लेकर
चिंता में रहता हूँ!

मन में समस्याएं भरी रहती हैं
जिसे लेकर परेशान रहता हूँ!

मुश्किलों का सामना नहीं करके
पीछे मैं रह गया!

मुझसे आगे बहुत निकल गए
देखता मैं रह गया!

मुझे भी है दम
आगे मैं भी बढूँगा!

बहुत सपने देखें हैं मैंने
मैं भी अपने सपने को साकार करूँगा !

"लडाई थी आगे आगे बढ़ने की"
जिसे मैं जीत नहीं पाया !
क्या-क्या सोच रहा था मैं
लेकिन कर नहीं पाया !

21 सित॰ 2009

कुछ नए पल

एक नया एहसास लेकर
नए जीवन जीने की
मैं निकला हूँ
छोर पकरने!
एक नई खुशी लेकर
अपनी उदासी को
मैं निकला हूँ
अलविदा कहने!
कुछ नए पल
जीने को मिले
ये सोचकर निकला हूँ
मैं अपनी मंजिल ढूँढने!

दिल की उदासी दूर हो!
दिल को खुशी हो!
दिल की प्यास बुझे!
दिल में नया एहसास जगे!
ये सोचकर निकला हूँ
मैं अपनी खुशी ढूँढने!

4 सित॰ 2009

कुछ शायरी...... मेरी भी सुनिये !

बहार आया तो आशियाना बदल गया!
जब भी मिलना चाहा, तेरा ठिकाना बदल गया!
अब चाहते हो क्यों मेरे पास
अब तो हसीं प्यार का ज़माना बदल गया!

गम मिला, नफरत मिली
मिला ज़माने की बेरुखी!
मिला ना फिर भी प्यार तेरा
मेरे किस्मत में शायद यही सही!

दिल हमारा आपके जुल्मों-सितम के काबिल ना था!
ये अभी मासूम था, आपके नफरत के काबिल ना था!

मोहब्बत में दर्द होती है
फिर भी गम नहीं होता!
दूर रहके भी, प्यार कम नहीं होता!

मेरे मैयत पर आके मेहंदी रचा लेना!
मेरे कफ़न से जोरा बना लेना!
अगर इससे भी सुकून ना मिले
तो मेरे कब्र पर आके सुहागरात मना लेना!

वो मिलते हैं पर दिल से नहीं!
वो बात करते हैं पर मन से नहीं!
वो प्यार तो करते हैं
पर हमसे नहीं!