बेटी आज की गाय नहीं
जिसे खूंटे में बाँध दो
और चरणे को थोरी सी घास दाल दो!
वह आज की नारी है
उसकी प्रगति जारी है!
आज...
न वह
जलती हुई
मोमबत्ती है
और न
पिघलता हुआ मोम,
आज की नारी
उन्नति की ऐसी शिला है
जिसके सहयोग से
समाज का नया रूप खिला है!
जिसे खूंटे में बाँध दो
और चरणे को थोरी सी घास दाल दो!
वह आज की नारी है
उसकी प्रगति जारी है!
आज...
न वह
जलती हुई
मोमबत्ती है
और न
पिघलता हुआ मोम,
आज की नारी
उन्नति की ऐसी शिला है
जिसके सहयोग से
समाज का नया रूप खिला है!