वक्त करता है कत्ल आहिस्ता-आहिस्ता
भूल जाते हैं लोग आहिस्ता-आहिस्ता।
जिंदगी देती जख्म मलहम भी देती है,
यूँ न भर जाते घाव आहिस्ता-आहिस्ता।
भूलना है वरदान तो जीने के वास्ते तो
हसरते जाओ भूल आहिस्ता-आहिस्ता।
आदमी का है काम बढ़ता जाए आगे
वक्त करता है न्याय आहिस्ता-आहिस्ता।
गर हो नहीं परवाह तो आसां है जीवन
ये समझ ले इंसान आहिस्ता-आहिस्ता।
jhwuqbznyr
भूल जाते हैं लोग आहिस्ता-आहिस्ता।
जिंदगी देती जख्म मलहम भी देती है,
यूँ न भर जाते घाव आहिस्ता-आहिस्ता।
भूलना है वरदान तो जीने के वास्ते तो
हसरते जाओ भूल आहिस्ता-आहिस्ता।
आदमी का है काम बढ़ता जाए आगे
वक्त करता है न्याय आहिस्ता-आहिस्ता।
गर हो नहीं परवाह तो आसां है जीवन
ये समझ ले इंसान आहिस्ता-आहिस्ता।
jhwuqbznyr












19 Comments:
मैं शुक्रगुजार हूँ वर्मा जी का जिन्होंने ध्यान दिलाया की मेरी टिपण्णी करने की सेटिंग्स में दोष है...नहीं तो मैं परेशां ही रहता की क्या बात है मेरे शुभचिंतक कहाँ गायब हो गए यकायक...
मैं समझ नहीं पा रहा हूँ की नवबारकहाँ चला गया...इसलिए सेटिंग्स में छेड़छाड़ करता रहा हूँ...
आप लोगों का स्वागत है अब
बहुत सुंदर रचना !!
बडा़ बेरहम है वक्त,
दर्द भी देता है,दवा भी देता है,
देता है सब आहिस्ता - आहिस्ता,
आहिस्ते से सर्वस्व हर लेता है.
आदमी का है काम बढ़ता जाए आगे
वक्त करता है न्याय आहिस्ता-आहिस्ता।
बहुत सुंदर...
आदमी का है काम बढ़ता जाए आगे
वक्त करता है न्याय आहिस्ता-आहिस्ता।
waah lajawab
वक्त करता है कत्ल आहिस्ता-आहिस्ता
भूल जाते हैं लोग आहिस्ता-आहिस्ता।
=====
वक्त की यही तो खासियत है. आपने कितने आसान शब्दो मे इस अनोखे सत्य को उकेरा है.
रचना बहुत सुन्दर
अब सही हो रही है टिप्पणी.
बेहतरीन रचना.
आपका लिखा हुआ मुझे बहुत पसंद आया
मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति
आदमी का है काम बढ़ता जाए आगे
वक्त करता है न्याय आहिस्ता-आहिस्ता।
बहुत बडी और अच्छी बात कही है.
मेरे सभी ब्लॉग पर आपकी सुंदर टिप्पणियों के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
वाह बहुत सुंदर रचना लिखा है आपने और बिल्कुल सही कहा है कि आदमी को हर कदम अहिस्ता अहिस्ता रखना चाहिए!
आपकी रचनाएँ बहुत अच्छी है, आपके ब्लॉग पर आना अच्छा लगता है!
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विज्ञान । HASH OUT SCIENCE
बहुत ही बेहतरीन लिखा है आभार्
आपकी हरेक रचना सुंदर होती है ..! मेरे पास हमेशा शब्द नही होते ..लेकिन ,हरेक रचना ,कई बार पढ़ती हूँ! !, समय,'आहिस्ता,आहिस्ता' क्या कुछ नही करता.....? वैसे तो उसकी रफ़्तार सदियों से वही रही है..हमें कभी एक पल सदियों से भारी लगता है,तो कभी एक पलमे सदियाँ गुज़ार आते हैं!
आपकी सभी टिप्पणियों के लिए आभारी हूँ ..!
माँ बेहतर हैं ..तहे दिलसे शुक्रिया .
Blogs तो एक सूची के तौरपे हैं ...जानती हूँ , समय की किल्लत सभी को रहती है..यथा समय और अपनी अपनी रुची के मुताबिक देखें...! इसीलिये तो विषयानुसार विभाजित किए..! लेकिन आपने इतने मनो भाव से 'chindichindi'ब्लॉग देखा..बड़ी खुशी हुई॥! ये पर्यावरण को देखते हुए, ज़रूरी बन गया है...कागज़ , प्लास्टिक और समय का कम से कम इस्तेमाल...recycling बेहद आवश्यक अंग है,पर्यावरण को सहेजने का...!
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प्रकृति तो सदा बताने की चेष्टा ही करती रही है की हर कार्य अपने वक्त पर, पर प्रयत्न आहिस्ता- अहिस्ता और सही दिशा में, पर इन्सान है की समझना ही नहीं चाहता और उसे तो म्रत्यु के आलावा बाकि सब कम में जल्दी ही मची रहती है, अहिस्ता- आहिस्ता ही सही पर प्रकृति इन्सान को यह सीख अमल में लेन के लिए शायद अभी तक प्रेरित करने में सफल न हो पाई, या कहें की अभी वक्त नहीं आया है, शायद सतयुग तक इंतजार करना पड़ेगा......
jindgi deti hai jakhm malham bhi deti hai
vah, atisundar
जिंदगी देती जख्म मलहम भी देती है,
यूँ न भर जाते घाव आहिस्ता-आहिस्ता
बहुत ही KHOOBSOORAT है ये शेर............. लाजवाब GAZAL
"waqt karta hai qatl aahista,aahista..."! Aapne stabdh kar diya...!
बहुत ही सुन्दर रचना. आभार.
bahut pyaari gazal si ji , waah waah
regards
vijay
please read my new poem " झील" on www.poemsofvijay.blogspot.com
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